‘पाम संडे’ पर ईसाई समुदाय को झटका! दिल्ली में जुलूस की अनुमति नहीं, क्या है धार्मिक महत्व?
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस साल ‘पाम संडे’ के पारंपरिक जुलूस की अनुमति नहीं दिए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. एक प्रमुख कैथोलिक संस्था ने दिल्ली पुलिस के इस फैसले को ‘चौंकाने वाला और अनुचित’ करार दिया है. संस्था का कहना है कि यह जुलूस हर वर्ष शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाता रहा है, और इस बार बिना किसी उचित कारण के इसे रोक दिया गया है.
कैथोलिक एसोसिएशन ऑफ द आर्चडायोसिस ऑफ दिल्ली (CAAD) के अध्यक्ष ए.सी. माइकल ने इस निर्णय की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने एक बयान में कहा, “यह बेहद चौंकाने वाला और अनुचित निर्णय है. यह जुलूस हमेशा शांतिपूर्ण रहा है और पुलिस व प्रशासन से तालमेल के साथ आयोजित होता रहा है. केवल कानून-व्यवस्था और यातायात का हवाला देकर इसे रोकना दोहरे मानदंडों को दर्शाता है, क्योंकि अन्य धार्मिक आयोजनों को अनुमति मिलती रही है.”
क्या है ‘पाम संडे’ और इसका महत्व?
‘पाम संडे’ ईसाई समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक दिवस है, जो ईसा मसीह के यरुशलम आगमन की स्मृति में मनाया जाता है. मान्यता है कि जब ईसा मसीह यरुशलम पहुंचे थे, तब उनके अनुयायियों ने ताड़ के पत्तों से उनका स्वागत किया था. उसी परंपरा को आज भी विश्वभर में जुलूस के रूप में जीवित रखा गया है.
पुलिस की चुप्पी
दिल्ली पुलिस की ओर से अब तक इस मसले पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. आयोजन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जुलूस को रोके जाने के पीछे यातायात और सुरक्षा कारणों का हवाला दिया गया है, लेकिन कोई स्पष्ट विवरण साझा नहीं किया गया.
मुख्यमंत्री ने किया विरोध
इस विवाद में केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन भी शामिल हो गए हैं. उन्होंने इस फैसले को धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करार देते हुए कहा, “दिल्ली पुलिस द्वारा सेक्रेड हार्ट कैथेड्रल में ‘कुरुथोला प्रदक्षिणम’ (पाम संडे जुलूस) के आयोजन की अनुमति नहीं देना अत्यंत निंदनीय है. यह धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने वाला कदम है.”
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में धार्मिक आयोजनों को लेकर निगरानी और अनुमति प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं. ईसाई समुदाय ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए अपना विरोध जताया है.
क्या आगे होगा आयोजन?
इस बात को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है कि क्या कोई वैकल्पिक आयोजन किया जाएगा या कोर्ट का रुख किया जाएगा. कैथोलिक संस्था का कहना है कि वह शांति और संवाद के जरिए आगे की रणनीति बनाएगी.

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