वाईएसआरसीपी नेता बी सत्यनारायण का आरोप: 'सीएम चंद्रबाबू नायडू चला रहे हैं बदले की राजनीति'
आंध्र प्रदेश में दो पूर्व नौकरशाहों की गिरफ्तारी से राज्य की राजनीति गरमा गई है। विपक्षी वाईएसआरसीपी ने सीएम चंद्रबाबू नायडू पर बदले की राजनीति करने का आरोप लगाया है। गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश के शराब घोटाले में शुक्रवार शाम दो पूर्व आईएएस अधिकारियों धनंजय रेड्डी और कृष्ण मोहन रेड्डी को गिरफ्तार किया गया है। ये दोनों अधिकारी पिछली वाईएसआरसीपी सरकार में काफी ताकतवर माने जाते थे। दोनों फिलहाल रिटायर हो चुके हैं।
'राज्य के प्रशासनिक ढांचे को नुकसान पहुंचाया जा रहा है':
आंध्र प्रदेश में कथित 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में एसआईटी ने दोनों से पूछताछ की थी और पूछताछ के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया। कृष्ण मोहन रेड्डी पूर्व सीएम वाईएस जगन मोहन रेड्डी के ओएसडी थे। रिटायर आईएएस अधिकारियों की गिरफ्तारी पर वाईएसआरसीपी नेता बी सत्यनारायण ने बयान जारी कर सीएम पर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि 'सीएम चंद्रबाबू नायडू बदले की राजनीति कर रहे हैं और राज्य के प्रशासनिक ढांचे को नुकसान पहुंचा रहे हैं। रिटायर अधिकारियों के खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए जा रहे हैं।'
क्या है शराब घोटाला:
आंध्र प्रदेश में कथित शराब घोटाले में वाईएसआरसीपी के कई शीर्ष नेताओं पर आरोप लगे हैं। आरोप है कि इस घोटाले के चलते हर महीने 50-60 करोड़ रुपये की रिश्वत ली गई और यह पैसा पार्टी फंड में भी जमा किया गया। रिमांड नोट में के राजशेखर रेड्डी उर्फ राज कासिरेड्डी को मुख्य आरोपी बताया गया है। कासिरेड्डी पूर्व सीएम और वाईएसआरसीपी प्रमुख जगन मोहन रेड्डी के सहयोगी हैं। इस मामले में पूर्व सीएम जगन मोहन रेड्डी पर भी आरोप लगाया जा रहा है।
कैसे किया गया घोटाला:
रिमांड नोट के मुताबिक, वाईएसआरसीपी के शीर्ष नेताओं ने विभिन्न शराब ब्रांडों से हर महीने 50-60 करोड़ रुपये की रिश्वत ली और रिश्वत देने वाले शराब ब्रांडों को सरकारी दुकानों के जरिए बिक्री में तरजीह दी गई। यह रैकेट साल 2019 में शुरू हुआ था, जिसके जरिए हर महीने वसूली जाने वाली रिश्वत को हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली में हवाला ऑपरेटरों के जरिए खपाया जाता था। आरोप है कि सरकारी खुदरा दुकानों के माध्यम से बिक्री के लिए शराब की खरीद के लिए ऑर्डर देने की प्रणाली में कथित रूप से हेराफेरी की गई, जिसमें राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित ब्रांडों को छोड़ दिया गया और निर्धारित सीमा से अधिक नए ब्रांडों का ऑर्डर दिया गया। आरोप है कि कम कीमत वाले ब्रांडों के लिए 150 रुपये प्रति केस, मध्यम श्रेणी के ब्रांडों के लिए 200 रुपये और उच्च श्रेणी के ब्रांडों के लिए 600 रुपये प्रति केस की रिश्वत ली गई।

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