दादी-नानी के नुस्खों का हिस्सा रहा है कनेर पौधा
नई दिल्ली । कनेर का पौधे न केवल औषधीय दृष्टिकोण से लाभकारी हैं बल्कि धार्मिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। कनेर को आयुर्वेद में करवीर के नाम से जाना जाता है। यह पौधा वर्षों से भारतीय परंपरा में दादी-नानी के नुस्खों का हिस्सा रहा है।
पुराने समय में जब चिकित्सा सुविधाएं सीमित थीं और आधुनिक दवाइयां उपलब्ध नहीं थीं, तब कनेर का उपयोग घरेलू इलाज के रूप में किया जाता था। खासकर त्वचा संबंधी रोगों, घावों और संक्रमण में इसका प्रयोग आम था। आयुर्वेद विशेषज्ञों का कहना है कि कनेर की पत्तियों और जड़ों में एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा के रोगों जैसे दाद, खुजली, फोड़े-फुंसी में राहत देने में सहायक होते हैं। इसकी पत्तियों को पीसकर लेप तैयार किया जाता है जिसे प्रभावित स्थान पर लगाने से संक्रमण खत्म होने में मदद मिलती है। इसके अतिरिक्त, पुराने और गहरे घावों पर भी इसकी पत्तियों का रस लाभकारी माना गया है। आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि कनेर का उपयोग हृदय रोग, सूजन और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं में भी किया जाता है। इसके लिए पत्तियों को तिल के तेल में गर्म करके मालिश की जाती है, जिससे दर्द और सूजन में राहत मिलती है। कनेर का धार्मिक महत्व भी काफी व्यापक है। हिंदू धर्म में इसे भगवान शिव और हनुमान जी की पूजा में उपयोग किया जाता है।
माना जाता है कि कनेर के फूल देवताओं को अर्पित करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर का वातावरण शुद्ध तथा सकारात्मक बना रहता है। यही कारण है कि इसे घर के आंगन या मंदिरों के पास लगाना शुभ माना जाता है। पूजा-पाठ में इसके फूलों का प्रयोग श्रृंगार और सजावट के रूप में भी किया जाता है। सर्दी-जुकाम की स्थिति में इसके सूखे पत्तों को जलाकर धूपन देने से वातावरण कीटाणु मुक्त होता है और सांस संबंधी राहत मिलती है। इसके पत्तों से बना काढ़ा कीटनाशक के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है।

विकास कार्यों में लेटलतीफी बर्दाश्त नहीं, गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में पूरे हों कार्य: राज्यमंत्री गौर
तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में एसजीएसआईटीएस, इंदौर की "शासी निकाय की 129वीं" बैठक हुई
सिंगाजी ताप विद्युत गृह में आधुनिक रेलवे प्लेटफॉर्म का शुभारंभ
इंदौर में 9 से 13 जून तक होगा ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों का सम्मेलन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
केरवा डैम के क्षतिग्रस्त वेस्टवियर का कार्य आगामी दो माह में पूर्ण करें : जल संसाधन मंत्री सिलावट
लोक कल्याणकारी और विकास कार्यों के लिए 38 हजार 555 करोड़ रूपये की स्वीकृति
बिजली उपभोक्ताओं को आवेदन करने की जरूरत नहीं, नई व्यवस्था लागू
EVM और चुनाव प्रक्रिया पर Gaurav Gogoi ने उठाए सवाल
भीषण गर्मी में राहत: सुखबासुपारा में नलकूप खनन से दूर हुई पेयजल समस्या, ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री का जताया आभार
Iran का 30 दिन का शांति प्रस्ताव—सुलह या नई चाल?