गृह जिले में नीतीश कुमार का विकास मॉडल सफल, फिर भी नालंदा की जनता अपने विधायकों से क्यों खफा?
नालंदा: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गढ़ नालंदा आज भी उनके नाम से गूंजता है। ऐतिहासिक नालंदा जिले के विकास में उन्होंने सड़क ढांचे को मजबूत करने से लेकर खेल स्टेडियम बनवाने तक कई काम किए हैं। यही कारण है कि 1995 से लगातार यहां की जनता ने नीतीश कुमार और उनकी पार्टी को विधानसभा चुनाव में समर्थन दिया है। मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य पर अन्य जगहों पर भले ही चर्चा होती हो, लेकिन नालंदा के मतदाता इसे कोई मुद्दा नहीं मानते हैं।
नालंदा में नीतीश का वर्चस्व
1996 से नालंदा लोकसभा सीट पर पहले समता पार्टी और फिर जेडीयू का दबदबा रहा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस यहां से तीन बार जीते, खुद नीतीश कुमार ने एक बार जीत दर्ज की और मौजूदा सांसद कौशलेंद्र कुमार 2024 में चौथी बार विजयी बने।
जनता का विश्वास नीतीश पर कायम
अस्थावां के एक किसान श्याम सुंदर प्रसाद कहते हैं, 'नीतीश कुमार ने हमारे लिए इतना काम किया है कि कोई उनके योगदान को भुला नहीं सकता। उन पर भ्रष्टाचार का आरोप भी विपक्ष नहीं लगा सकता।' वहीं, बेलदारी पर बाजार में चाय बेचने वाले सतीश शर्मा का कहना है, 'नीतीश जी उम्र के बावजूद पूरी तरह सक्षम हैं। छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याएं सबको होती हैं, लेकिन वे सरकार चलाने में सक्षम हैं।'
विधायकों को लेकर जनता में नाराजगी
2020 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने नालंदा की सात में से छह सीटों पर चुनाव लड़ा और पांच जीतीं। बीजेपी और राजद को एक-एक सीट मिली। जेडीयू के ज्यादातर विधायक लगातार चार से ज्यादा बार जीतते आए हैं। लेकिन अब जनता में असंतोष दिखने लगा है।
कार्तिसराय के मोबाइल दुकानदार अरुण कुमार कहते हैं, 'अस्थावां से जितेंद्र कुमार पांच बार जीत चुके हैं, लेकिन हर बार सिर्फ नीतीश जी के नाम पर। पार्टी को नए चेहरे को मौका देना चाहिए।'
नालंदा में बदलाव की मांग
नालंदा विधानसभा सीट से राज्य सरकार के मंत्री श्रवण कुमार सात बार लगातार जीत चुके हैं। हालांकि यहां भी युवाओं में असंतोष है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे भावेश कुमार कहते हैं, 'अगर नीतीश जी किसी नए उम्मीदवार को मौका दें तो बेहतर होगा। लेकिन चाहे उम्मीदवार कोई भी हो, नीतीश जी के नाम पर ही वोट पड़ेगा।'
चुनावी समीकरण
नालंदा विधानसभा चुनाव इस बार नीतीश कुमार की लोकप्रियता और जेडीयू विधायकों के खिलाफ नाराजगी के बीच संतुलन का मैदान बनने जा रहा है। जनता नीतीश कुमार के विकास कार्यों और साफ छवि को सराहती है, लेकिन स्थानीय विधायकों से बेहद नाराज़ है।

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