जशपुर में जमीन विवाद ने लिया हिंसक रूप, कई घायल, चार आरोपी गिरफ्तार
जशपुर। जशपुर जमीन विवाद ने रविवार को भट्ठी कोना गांव में हिंसक रूप ले लिया, जब दो पक्षों के बीच झड़प में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। बगीचा थाना क्षेत्र के इस मामले में प्रार्थी सज्जन राम नगेसिया (58) और आरोपी देवनंदन यादव के परिवार के बीच सरकारी भूमि खसरा नंबर 221/1 को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा था।
30 नवंबर 2025 की सुबह करीब 10 बजे, प्रार्थी पक्ष अपनी कब्जे वाली भूमि (खसरा 221/3) पर घेरा लगाने और हल चलाने पहुंचे थे। तभी आरोपी देवनंदन यादव अपने परिजनों के साथ लाठी-डंडे, पत्थर और कुल्हाड़ी लेकर पहुंचे और लगाई गई बाड़ को उखाड़ने लगे। विरोध करने पर विवाद बढ़ा और आरोपी पक्ष ने प्रार्थी परिवार पर हमला कर दिया।
हमले के दौरान आरोपी राजेश यादव ने कुल्हाड़ी से प्रार्थी के बेटे के सिर पर वार किया, जिससे वह मौके पर ही बेहोश हो गया। इसके अलावा सज्जन राम, उनकी बेटी और अन्य परिजन भी घायल हो गए। घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम बगीचा और एसडीओपी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया।
घायलों को शासकीय अस्पताल बगीचा में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस ने चार आरोपियों—देवनंदन यादव (68), केशव प्रसाद यादव (66), राजेश यादव (36) और रामस्नेही यादव (36)—को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया। मौके से हथियार भी जब्त किए गए हैं।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि जशपुर जमीन विवाद मामले की गहन जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाएं और हिंसा का सहारा न लें।

मद्महेश्वर-तुंगनाथ धाम के कपाट खुलने की तारीख कल होगी घोषित, डीएम की मौजूदगी में होंगे धार्मिक अनुष्ठान
TMC सांसद का केंद्र पर हमला, संसद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
केदारनाथ यात्रा 2026 का काउंटडाउन शुरू, धाम पहुंचकर DM-SP ने तैयारियों का लिया जायजा
राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, असम सीएम पर लगाए गंभीर आरोप
12,500 में खरीदे 30 हजार के नकली नोट, पुलिस ने किया बड़ा खुलासा
बिहार में 15 को नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण संभव, पीएम के शामिल होने की भी संभावना
कानूनी लड़ाई में मिली राहत, फरमान खान को बड़ा फायदा
दुर्ग में ट्रैफिक सख्ती, हेलमेट न पहनना पड़ा भारी