तेजस एमके1ए की डिलीवरी 2026 तक टली, 12 चाहिए थे सिर्फ 5 इंजन मिले
नई दिल्ली। भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस एमके1ए की पहली डिलीवरी अब 2026 तक खिसक गई है। वजह है अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक की इंजन सप्लाई में भारी देरी। पांचवां एफ-404 इंजन अब भारत पहुंचने वाला है, लेकिन इस साल दिसंबर तक 12 इंजन मिलने थे, जबकि सिर्फ 5 ही आए हैं। बाकी इंजन न आने से एचएएल के पास बने हुए 10 तैयार विमान खड़े हैं, डिलीवरी नहीं हो पा रही।
17 अक्टूबर 2025 को नासिक से तेजस एमके1ए की पहली उड़ान सफलतापूर्वक हो चुकी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसका शुभारंभ किया था। लेकिन अब हथियार एकीकरण, फ्लाइट ट्रायल और टेस्टिंग बाकी है, जिसके लिए सभी विमानों में इंजन लगना जरूरी है। 2021 में 99 एफ-404 इंजनों का ऑर्डर दिया गया था, जो 2029 तक आने थे। लेकिन कंपनी की प्रोडक्शन लाइन 5 साल बंद रहने से सप्लाई चेन पूरी तरह बिगड़ गई। अब नया प्लान है कि 2026 से हर महीने 2 इंजन मिलेंगे।
इस देरी से भारतीय वायुसेना को पुराने मिग-21 जैसे विमानों को और लंबे समय तक चलाना पड़ेगा। 83 तेजस एमके1ए का पूरा ऑर्डर अब 2029 तक खत्म होगा, यानी 4 साल लेट। फिर भी एचएएल ने प्रोडक्शन बढ़ा दिया है। नासिक में 8 और बेंगलुरु में 16 विमान सालाना बन रहे हैं। कुल 24 विमान प्रति वर्ष का लक्ष्य है।
नवंबर 2025 में 97 अतिरिक्त तेजस एमके1ए के लिए 113 इंजनों का नया सौदा भी हो चुका है, जिनकी डिलीवरी 2027 से शुरू होगी। आगे तेजस एमके2 का रोलआउट 2027 में होगा, जो और ताकतवर होगा। लंबे समय में कावेरी स्वदेशी इंजन पर भी काम चल रहा है, लेकिन अभी विदेशी इंजन पर ही निर्भरता है। विशेषज्ञों का कहना है कि देरी चिंताजनक है, लेकिन एचएएल की मेहनत से कार्यक्रम अब फिर पटरी पर लौट रहा है। 2026 में वायुसेना को पहला तेजस एमके1ए बैच मिलेगा, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम होगा।

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