ITO-अक्षरधाम कनेक्शन: 4 किमी लंबा एलिवेटेड कोरिडोर बनेगा, यात्रियों को मिलेगा फायदा
दिल्ली सरकार पूर्वी दिल्ली की सबसे व्यस्त सड़कों में शामिल स्वामी दयानंद मार्ग को जाम मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है. ट्रंक ड्रेन-1 के किनारे करीब चार किलोमीटर लंबा छह लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर प्रस्तावित है. ये आनंद विहार से शाहदारा को जोड़ने वाले इस अहम रूट पर थ्रू ट्रैफिक के लिए वैकल्पिक रास्ता देगा. इससे रोजाना लाखों यात्रियों को दिल्ली के ट्रैफिक जाम से राहत मिलने की उम्मीद है |
प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर की शुरुआत श्यामलाल कॉलेज और बिहारी कॉलोनी के पास से होगी. यह जीटी रोड पर शाहदारा फ्लाईओवर के नजदीक से निकलते हुए गाजीपुर ड्रेन के साथ-साथ चलेगा और करकरी मोर फ्लाईओवर के पास समाप्त होगा. छह लेन वाला यह कॉरिडोर प्रीत विहार, आईटीओ, अक्षरधाम और गाजीपुर जाने वाले यात्रियों के लिए सीधा और तेज कनेक्शन देगा, जिससे पूर्वी दिल्ली यातायात राहत को मजबूती मिलेगी |
पूर्वी दिल्ली की ट्रैफिक लाइफलाइन
ट्रांस यमुना डेवलपमेंट बोर्ड के चेयरमैन अरविंदर सिंह लवली के मुताबिक, स्वामी दयानंद मार्ग पूर्वी दिल्ली की ट्रैफिक की लाइफलाइन है. यह कॉरिडोर मुनक एलिवेटेड कॉरिडोर की तर्ज पर बनाया जाएगा. इसके पूरा होने से गांधी नगर, प्रीत विहार, गगन विहार, ओल्ड अनारकली, करकड़ूमा और कृष्णा नगर जैसे इलाकों में जाम की समस्या काफी हद तक कम होगी |
पर्यावरण नियमों का पालन
नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल के नियमों के तहत ड्रेन को कवर नहीं किया जा सकता, लेकिन ड्रेन के किनारे पिलर बनाकर एलिवेटेड रोड बनाना पूरी तरह वैध है. अधिकारियों का कहना है कि बारापुला फ्लाईओवर भी इसी मॉडल पर बना है और इससे प्राकृतिक ड्रेन पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। यानी दिल्ली परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंजूरी के सभी मानकों का पालन किया जाएगा |
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
ईस्ट दिल्ली आरडब्ल्यूए जॉइंट फ्रंट के प्रमुख बीएस वोहरा का कहना है कि यह सड़क लंबे समय से उपेक्षित रही है. पीक आवर्स में पांच बड़े रेड लाइट जंक्शनों पर हर जगह पांच मिनट से ज्यादा इंतजार करना पड़ता है. उन्होंने उम्मीद जताई कि योजना जल्द अमल में आए. साथ ही पूर्वी दिल्ली में नालियों के प्रदूषण पर भी ध्यान देने की मांग की गई है, ताकि जैव उपचार और नाली उपचार से दुर्गंध की समस्या दूर हो सके |
क्या है आगे की योजना?
इस प्रोजेक्ट की डीपीआर सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग तैयार करेगा. जल्द ही कंसल्टेंट नियुक्त कर व्यवहार्यता अध्ययन कराई जाएगी. जरूरत पड़ने पर ट्रांस यमुना बोर्ड फंडिंग में सहयोग करेगा. पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा ने साइट का निरीक्षण कर भविष्य की ट्रैफिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजना की समीक्षा भी की है. प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद यह दिल्ली इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पूर्वी दिल्ली के लाखों लोगों के लिए रोजमर्रा की ट्रैफिक परेशानी से बड़ी राहत साबित होगा |

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