परंपरा से आगे बढ़ती सोच: हर वर्ग के युवा सीख रहे वेद मंत्र
बदल रहा है दौर: अब केवल पूजा-पाठ नहीं, उज्ज्वल भविष्य का आधार बन रही है संस्कृत
गाजियाबाद: कभी माना जाता था कि संस्कृत केवल ऋषि-मुनियों या एक विशेष वर्ग तक सीमित है, लेकिन आज यह धारणा पूरी तरह बदल चुकी है। आधुनिक युग में छात्र संस्कृत और वेद विद्या को एक शानदार करियर विकल्प के रूप में अपना रहे हैं। गाजियाबाद के संस्कृत संस्थानों से निकले छात्र आज न केवल भारत के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, बल्कि अमेरिका जैसे देशों में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं।
महर्षि दयानंद गुरुकुल: सामाजिक समरसता की मिसाल
गाजियाबाद स्थित महर्षि दयानंद संस्कृत गुरुकुल महाविद्यालय के प्रधानाचार्य आचार्य दिनेश कुमार शुक्ल के अनुसार, उनके यहाँ पढ़ने वाले 120 छात्रों में से लगभग 60 प्रतिशत छात्र गैर-ब्राह्मण परिवारों (जाट, गुर्जर, राजपूत व अन्य) से हैं। ये बच्चे न केवल वेदों और मंत्रों का शुद्ध उच्चारण सीख रहे हैं, बल्कि साथ में अंग्रेजी, गणित और विज्ञान जैसे आधुनिक विषयों में भी निपुण हो रहे हैं। इस शैक्षणिक सत्र में विद्यालय का परिणाम शत-प्रतिशत रहा है, जो छात्रों की लगन को दर्शाता है।
दूधेश्वरनाथ गुरुकुल: सात समंदर पार तक पहुँचा संस्कृत का गौरव
दूधेश्वर वेद विद्यालय संस्थान के छात्रों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की है। संस्थान के प्रधानाचार्य तयोराज उपाध्याय ने बताया कि:
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विदेशों में परचम: यहाँ के छात्र हरिओम द्विवेदी, प्रकाश पांडेय और पूजन आचार्य वर्तमान में अमेरिका में संस्कृत शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं।
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प्रतिष्ठित पदों पर नियुक्ति: संस्थान के पूर्व छात्र विनय शुक्ला नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में सहायक प्रोफेसर हैं।
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देशभर में सेवाएं: बिहार के गया, नवादा और पटना में क्रमशः शिवम शुक्ला, अमन झा और गौरव मिश्रा सरकारी संस्कृत अध्यापक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। वहीं, अंबाला (हरियाणा) के श्री विद्या वेद गुरुकुल में अर्जुन आचार्य और लोकराज भट्ट वेदों के शिक्षक हैं।
छात्र से प्रधानाचार्य तक का सफर
एक प्रेरणादायक उदाहरण खुद प्रधानाचार्य तयोराज उपाध्याय हैं। मूल रूप से नेपाल के रहने वाले तयोराज ने वर्ष 2001 में इसी विद्यालय में छठी कक्षा में प्रवेश लिया था। गाजियाबाद से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने तिरुपति के श्री वेंकेटेश्वर वैदिक विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। 2015 में वे वापस इसी संस्थान में लौटे और अपनी मेहनत के बल पर शिक्षक से प्रधानाचार्य के पद तक पहुँचे।

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