गंगा एक्सप्रेसवे टोल विवाद: तीन दिन में तीन बार बदलीं दरें, यात्रियों में हड़कंप
गंगा एक्सप्रेसवे: टोल दरों पर संशय समाप्त, अब कार के लिए चुकाने होंगे 1765 रुपये
लखनऊ: उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने देश के सबसे लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के लिए टोल टैक्स की दरों को अंतिम रूप दे दिया है। पिछले तीन दिनों से चल रहे मंथन के बाद, बृहस्पतिवार को नई कीमतें तय की गईं। ताज़ा दरों के अनुसार, मेरठ से प्रयागराज तक की एकल यात्रा के लिए कार चालकों को अब 1765 रुपये का भुगतान करना होगा।
कीमतों में उतार-चढ़ाव का घटनाक्रम
594 किलोमीटर लंबे इस विशाल एक्सप्रेसवे की टोल दरों को लेकर पिछले कुछ दिनों में काफी ऊहापोह की स्थिति रही:
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शुरुआती योजना: पहले हल्के वाहनों के लिए टोल 1800 रुपये प्रस्तावित था।
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बुधवार का संशोधन: थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर इसे घटाकर 1514 रुपये किया गया था।
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अंतिम निर्णय: बृहस्पतिवार को यूपीडा ने सभी तकनीकी पहलुओं पर विचार करने के बाद 1765 रुपये की दर को मंजूरी दी।
टोल राजस्व का बंटवारा
एक्सप्रेसवे के निर्माण और रखरखाव में शामिल कंपनियों के बीच टोल राशि का वितरण भी तय कर दिया गया है। 1765 रुपये के कुल शुल्क में से:
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अडानी इंटरप्राइजेज: 1365 रुपये का हिस्सा प्राप्त करेगी।
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आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर्स: 440 रुपये का हिस्सा प्राप्त करेगी।
विकास की नई जीवनरेखा
29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन किए गए इस एक्सप्रेसवे का उद्देश्य पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सीधे पूर्वी उत्तर प्रदेश से जोड़ना है। मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे जिलों से गुजरने वाला यह मार्ग न केवल सफर का समय कम करेगा, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी गति देगा।
इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से कानपुर और वाराणसी के बीच कनेक्टिविटी और बेहतर होगी। प्रशासन का मानना है कि इन दरों के लागू होने से एक्सप्रेसवे के रखरखाव और यात्रियों को मिलने वाली विश्वस्तरीय सुविधाओं को सुचारू रूप से जारी रखने में मदद मिलेगी। हल्के वाहनों के अलावा दोपहिया और अन्य भारी वाहनों के लिए भी अलग-अलग स्लैब के अनुसार टोल वसूला जाएगा।

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