‘न्यायाधीश’ से ‘ED निदेशक’ तक: Patna के शख्स की ठगी का चौंकाने वाला खेल
पटना का शातिर जालसाज अभिषेक अग्रवाल फिर गिरफ्तार: अब फर्जी ED अधिकारी बनकर DM को दी दबिश
पटना: वर्ष 2022 में बिहार के तत्कालीन डीजीपी को हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनकर फोन करने वाला कुख्यात जालसाज अभिषेक अग्रवाल एक बार फिर सलाखों के पीछे है। बिहार पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने उसे पटना के कोतवाली थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। इस बार उसने प्रवर्तन निदेशालय (ED) का फर्जी अधिकारी बनकर जिलाधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों को ठगने का प्रयास किया था।
DM को कॉल करना पड़ा भारी
ताजा मामला भोजपुर जिले से जुड़ा है। आरोप है कि 27 अप्रैल को अभिषेक अग्रवाल ने भोजपुर के जिलाधिकारी (DM) तनय सुल्तानिया को फोन किया। उसने खुद को ईडी का बड़ा अधिकारी बताया और धौंस दिखाने की कोशिश की। शक होने पर जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से 28 अप्रैल को नवादा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
STF और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और वैज्ञानिक अनुसंधान का सहारा लिया। कॉल की लोकेशन पटना की नागेश्वर कॉलोनी में मिली। इसके बाद भोजपुर पुलिस और एसटीएफ की टीम ने घेराबंदी कर अभिषेक को दबोच लिया। आरोपी को नवादा थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है। उसके खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (EOU) और खाजेकलां थाने में भी मामले दर्ज हैं।
पुराना है जालसाजी का इतिहास
अभिषेक अग्रवाल का विवादों और धोखाधड़ी से पुराना नाता रहा है:
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2022 का कांड: उसने पटना हाई कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस संजय करोल बनकर तत्कालीन डीजीपी एस.के. सिंघल को फोन किया था। उस वक्त उसने गया के तत्कालीन एसएसपी आदित्य कुमार को एक केस में राहत दिलाने के लिए दबाव बनाया था।
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बड़े अधिकारियों से सांठगांठ: जांच में यह भी सामने आया था कि अभिषेक के संबंध बिहार के कई रसूखदार आईएएस और आईपीएस अधिकारियों से थे। वह आसानी से अधिकारियों के बीच पैठ बना लेता था और उनके साथ तस्वीरें खिंचवाकर अपनी साख बढ़ाता था।
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जमानत पर था बाहर: डीजीपी को फर्जी कॉल करने के मामले में वह जेल जा चुका था, लेकिन बाद में कोर्ट से उसे जमानत मिल गई थी। बाहर आते ही उसने अब 'फर्जी ईडी अधिकारी' बनकर ठगी का नया तरीका अपनाया।

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