भारत में बन रही दुनिया की सबसे ऊंची सुरंग, 15,800 फीट की ऊंचाई पर निर्माण
नई दिल्ली: भारत का बुनियादी ढांचा तेजी से नई ऊंचाइयों को छू रहा है। अटल टनल की सफलता के बाद अब भारत शिंकुन ला टनल (Shinkun La Tunnel) के रूप में इंजीनियरिंग का एक और चमत्कार पेश करने जा रहा है। यह सुरंग जब बनकर तैयार होगी, तो यह 15,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल सुरंग बन जाएगी। 26 जुलाई 2024 को इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम शुरू हुआ था और वर्तमान में, यानी मई 2026 में, इसका निर्माण कार्य पूरे जोर-शोर से चल रहा है।
लद्दाख और हिमाचल के बीच 'सदाबहार' संपर्क
शिंकुन ला सुरंग का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी और लद्दाख की जंस्कार घाटी के बीच हर मौसम में सुगम संपर्क सुनिश्चित करेगी। वर्तमान में भारी बर्फबारी के कारण यह रास्ता सर्दियों में महीनों तक बंद रहता है, लेकिन इस 4.1 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब सुरंग के बनने से यह दूरी न केवल कम होगी, बल्कि साल के 365 दिन खुली रहेगी। बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) इसे 'प्रोजेक्ट योजक' के तहत तैयार कर रहा है, जो निमू-पदम-दारचा मार्ग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सुरक्षा और तकनीक का बेजोड़ संगम
आधुनिक इंजीनियरिंग के मानकों को ध्यान में रखते हुए इस सुरंग में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। इसमें हर 500 मीटर पर क्रॉस-पैसेज बनाए गए हैं, जो किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों को एक ट्यूब से दूसरी सुरक्षित ट्यूब में जाने का रास्ता देंगे। 1,681 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना का लक्ष्य अगस्त 2028 तक काम पूरा करना है। यह सुरंग न केवल स्थानीय पर्यटन और आर्थिक विकास को गति देगी, बल्कि चीन सीमा के करीब होने के कारण भारतीय सेना के लिए रसद और भारी उपकरणों की आवाजाही को भी बेहद तेज और सुरक्षित बना देगी।
रणनीतिक महत्व और क्षेत्रीय विकास
रणनीतिक दृष्टि से यह सुरंग भारत के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाली है। यह सुरंग चीन की 'मिला टनल' (15,590 फीट) के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देगी। इसके बन जाने से लेह तक पहुँचने के लिए एक वैकल्पिक और सुरक्षित तीसरा मार्ग मिल जाएगा, जो मौजूदा मार्गों की तुलना में कम समय लेगा। लद्दाख के सुदूर गांवों, विशेषकर जंस्कार घाटी के निवासियों के लिए यह सुरंग एक नई जीवन रेखा के समान होगी, जो उन्हें मुख्यधारा से जोड़ेगी और सर्दियों में होने वाली स्वास्थ्य व राशन संबंधी समस्याओं का अंत करेगी।
मुख्य विवरण:
ऊंचाई: 15,800 फीट (दुनिया की सबसे ऊंची)
लंबाई: 4.1 किमी (ट्विन-ट्यूब)
डेडलाइन: अगस्त 2028 तक पूरा होने की उम्मीद
लागत: 1,681 करोड़ रुपये

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