चीता KP 2 की एंट्री से रणथंभौर के आसपास दहशत, ग्रामीण सहमे
सवाई माधोपुर: रणथंभौर के रिहायशी इलाकों में कूनो के चीते की दस्तक, दहशत के साये में जीने को मजबूर ग्रामीण
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से रास्ता भटककर राजस्थान की सीमा में दाखिल हुआ चीता 'KP2' पिछले करीब तीन हफ्तों से रणथंभौर टाइगर रिजर्व के नजदीकी गांवों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। इस वन्यजीव का विचरण न केवल जंगल के कोर एरिया में बना हुआ है, बल्कि यह लगातार कैलाशपुरी, दुमोदा और मोजीपुरा जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों के बेहद करीब देखा जा रहा है। चीते की बेखौफ मौजूदगी ने ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ा दी है और लोग अपने ही घरों और खेतों में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। वन विभाग और कूनो से आई विशेष टीम हालांकि लगातार इस वन्यजीव की निगरानी कर रही है, लेकिन आबादी क्षेत्र में इसकी बढ़ती सक्रियता ने प्रशासन की चुनौतियों को बढ़ा दिया है।
अमरूद के बगीचों में डेरा और पालतू मवेशियों पर मंडराता खतरा
ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, चीता KP2 इन दिनों कैलाशपुरी गांव के पास स्थित अमरूद के बगीचों को अपना ठिकाना बनाए हुए है, जिससे किसानों के लिए फसलों की देखरेख करना असंभव हो गया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि इस शिकारी जीव ने क्षेत्र में कुछ पालतू बकरियों को अपना निवाला बनाया है, जिससे पशुपालकों में भारी आर्थिक नुकसान का डर बैठ गया है। सिंचाई के समय खेतों में जाना अब जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है, क्योंकि घने पेड़ों और झाड़ियों के बीच चीते की मौजूदगी का अंदाजा लगा पाना मुश्किल होता है। ग्रामीणों ने इस संबंध में वन विभाग के उच्चाधिकारियों और डीएफओ को अपनी चिंताओं से अवगत कराया है, परंतु अब तक केवल निगरानी का भरोसा मिलने से उनमें गहरा रोष व्याप्त है।
बच्चों की शिक्षा और सामान्य जनजीवन पर पड़ा प्रतिकूल प्रभाव
वन्यजीव के डर का सबसे बुरा असर स्कूली बच्चों और महिलाओं पर देखने को मिल रहा है, जहाँ कई बच्चों ने दहशत के कारण स्कूल जाना ही बंद कर दिया है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल जाने वाले रास्तों पर ही अक्सर चीते के पदचिह्न और उसकी मौजूदगी देखी जा रही है, जिसके चलते वे अपने बच्चों को अकेले बाहर भेजने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा रहता है और शाम ढलते ही लोग खुद को घरों में कैद कर लेते हैं। रोजमर्रा के जरूरी कार्यों के लिए भी ग्रामीणों को समूह बनाकर निकलना पड़ रहा है, जिससे सामान्य जीवन पूरी तरह से पटरी से उतर गया है।
कूनो से रणथंभौर तक का सफर और विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली
उल्लेखनीय है कि KP2 नामक यह चीता लगभग 20 दिन पहले मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क की सीमाएं लांघकर राजस्थान के पालीघाट रेंज स्थित अजीतपुरा गांव पहुंचा था। इसके बाद से वह लगातार रणथंभौर के विभिन्न जोनों और उससे सटी कॉलोनियों में भ्रमण कर रहा है। हालांकि अभी तक किसी व्यक्ति पर हमले की कोई खबर सामने नहीं आई है, लेकिन ग्रामीणों की मांग है कि इसे जल्द से जल्द पकड़कर किसी सुरक्षित और निर्जन स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। फिलहाल वन विभाग की टीमें चीते की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए रेडियो कॉलर और अन्य तकनीकी उपकरणों का सहारा ले रही हैं, ताकि किसी भी संभावित टकराव की स्थिति को टाला जा सके।

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