राजस्थान में बदले बीजेपी के सुर: कोर एजेंडे को छोड़ अब सोशल इंजीनियरिंग और जातीय क्षत्रपों को साधने पर जोर
जयपुर | उत्तर प्रदेश और बिहार के राजनीतिक घटनाक्रमों से सबक लेते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राजस्थान में एक बार फिर पारंपरिक जातीय समीकरणों को साधने की राह पर लौटती दिखाई दे रही है। सूबे से राज्यसभा भेजे जाने वाले उम्मीदवारों की सूची में केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का पत्ता कटना इस बात का साफ इशारा है कि पार्टी को अब पंजाब से ज्यादा चिंता राजस्थान में अपनी सत्ता को दोबारा बरकरार रखने (रिपीट करने) की है। इस टिकट वितरण ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या अब भाजपा केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे, हिंदुत्व के एजेंडे और भजनलाल सरकार के कामकाज के भरोसे रहने का जोखिम नहीं उठाना चाहती।
जाट और गुर्जर समुदायों को साधकर दिया बड़ा राजनीतिक संदेश
राजस्थान की सियासत में पिछले कुछ समय से जाट और गुर्जर समाज के भीतर अंदरूनी असंतोष की खबरें लगातार सुर्खियां बनती रही हैं। किसान आंदोलन, आरक्षण की मांग और स्थानीय स्तर पर कद्दावर चेहरों की उपेक्षा जैसे मुद्दों के चलते इन दोनों बड़े वोट बैंक के बीच नाराजगी बढ़ रही थी। भाजपा आलाकमान ने इस बार राज्यसभा टिकटों के बंटवारे में सूझबूझ दिखाते हुए इन प्रभावशाली जातियों के नेताओं को तरजीह दी है। आमतौर पर इस तरह के जातीय गुणा-भाग लोकसभा या विधानसभा चुनावों में देखने को मिलते थे, लेकिन राज्यसभा भेजने में भी इस फॉर्मूले को लागू करना यह दिखाता है कि पार्टी जमीनी स्तर पर किसी भी वर्ग को नाराज नहीं करना चाहती।
बिट्टू की जगह स्थानीय चेहरों को प्राथमिकता और विपक्ष की घेराबंदी
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला फैसला पंजाब के बड़े चेहरे रवनीत सिंह बिट्टू की जगह राजस्थान के स्थानीय क्षत्रपों को मौका देना रहा। राज्य सरकार के करीब डेढ़ साल के कार्यकाल में विपक्ष लगातार रोजगार, महंगाई और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेर रहा है। ऐसे में भाजपा संगठन यह भली-भांति समझ चुका है कि केवल राष्ट्रीय मुद्दों या मोदी लहर के भरोसे आगामी चुनावी वैतरणी को पार नहीं किया जा सकता। राज्य में अपनी पकड़ मजबूत रखने और विपक्ष के हमलों की धार को कुंद करने के लिए क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक प्रतिनिधित्व को मजबूत करना अब पार्टी की मजबूरी और रणनीति दोनों बन गया है।
भविष्य के चुनावों के लिए अभी से बिछाई गई गोटियां
राजनीतिक समीक्षकों के अनुसार, राजस्थान से उच्च सदन के लिए हुआ यह चयन महज एक संसदीय प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह भविष्य की चुनावी बिसात का एक अहम हिस्सा है। जाट और गुर्जर समाज को मुख्यधारा में प्रतिनिधित्व देकर भाजपा ने यह साफ संदेश दे दिया है कि वह सूबे के सामाजिक ताने-बाने को लेकर बेहद गंभीर है। पार्टी ने आने वाले विधानसभा और अन्य स्थानीय चुनावों के मद्देनजर अभी से अपनी गोटियां बिछानी शुरू कर दी हैं, ताकि ऐन वक्त पर किसी भी तरह के एंटी-इंकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) या सामाजिक बिखराव के खतरे को समय रहते टाला जा सके।

राशिफल 06 जून 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
सुशासन तिहार: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सुनीं 17 गांवों की समस्याएं
राज्य के 7 जिलों में लोगों की आमदनी बढ़ाने के लिए एकीकृत आजीविका कार्यक्रम
राज्य वित्त आयोग 6 जून को करेगा नर्मदापुरम का दौरा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिलीं पर्वतारोही अंजना यादव
पर्यावरण दिवस पर मार्कफेड में वृक्षारोपण