ब्रेस्ट कैंसर के छिपे संकेतों को न करें नजरअंदाज, विशेषज्ञ ने किया अहम खुलासा
ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) आज दुनियाभर में महिलाओं के लिए सबसे बड़ा और तेजी से बढ़ता हुआ स्वास्थ्य संकट बन चुका है। आंकड़ों के मुताबिक, हर साल इस जानलेवा बीमारी से दुनिया भर में करीब 7.75 लाख महिलाएं अपनी जान गंवा देती हैं। कुछ दशकों पहले तक यह बीमारी बड़ी उम्र की महिलाओं में देखी जाती थी, लेकिन अब कम उम्र की युवतियां भी इसकी चपेट में आ रही हैं।
स्तन में गांठ होना, आकार या त्वचा के रंग में बदलाव और असामान्य डिस्चार्ज इसके मुख्य लक्षण हैं। वैसे तो इसके पीछे खराब जीवनशैली, मोटापा और जेनेटिक्स (आनुवांशिकता) को जिम्मेदार माना जाता है, लेकिन हाल ही में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कैंसर सम्मेलन (International Cancer Conference) में डॉक्टरों ने एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा किया है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान इस ओर खींचा है। कैंसर विशेषज्ञों के मुताबिक, करियर और लाइफस्टाइल के चक्कर में बच्चे पैदा करने में देरी करना महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा खतरनाक स्तर तक बढ़ा रहा है।
करियर की चाह और मातृत्व में देरी बन रही वजह
आज के आधुनिक दौर में महिलाएं शिक्षा, करियर, आर्थिक आत्मनिर्भरता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता दे रही हैं। यही वजह है कि शादी और मातृत्व (प्रेग्नेंसी) को अक्सर 30 या 35 साल की उम्र के बाद के लिए टाल दिया जाता है। लेकिन यह देरी महिलाओं की प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया (बायोलॉजिकल क्लॉक) को बुरी तरह प्रभावित कर रही है।
इटली के गैलेरिया हॉस्पिटल में मेडिकल ऑन्कोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. एंड्रिया डेसेंसी कहते हैं:
आजकल महिलाएं पहले की तुलना में बहुत देरी से कंसीव (गर्भधारण) कर रही हैं। लोग इस विषय पर खुलकर बात करने से कतराते हैं, लेकिन देर से गर्भधारण करना ही युवाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ने की सबसे मुख्य वजहों में से एक है।"
बायोलॉजिकली क्या है बच्चे पैदा करने की सही उम्र?
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, कम उम्र में मां बनने से ओवेरियन (अंडाशय) और ब्रेस्ट कैंसर से प्राकृतिक सुरक्षा मिलती है।
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सही उम्र: डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चे पैदा करने का सबसे आदर्श और सुरक्षित समय 20 से 35 साल के बीच का होता है।
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35 के बाद खतरा: 35 साल की उम्र पार करने के बाद न केवल गर्भधारण करने में दिक्कतें आती हैं, बल्कि ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम भी कई गुना बढ़ जाता है। चिंता की बात यह है कि इस गंभीर रिस्क के बारे में समाज में जागरूकता न के बराबर है।
क्या है इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण?
प्रजनन, हार्मोन्स और ब्रेस्ट कैंसर के बीच का वैज्ञानिक संबंध बेहद सीधा है:
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जब तक कोई महिला गर्भधारण नहीं करती, तब तक उसके स्तन की कोशिकाएं (Breast Cells) पूरी तरह अपरिपक्व और संवेदनशील अवस्था में रहती हैं।
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ये अपरिपक्व कोशिकाएं शरीर के एस्ट्रोजन हार्मोन के प्रति बहुत ज्यादा संवेदनशील होती हैं। लंबे समय तक एस्ट्रोजन के संपर्क में रहने के कारण इन कोशिकाओं के असामान्य रूप से बढ़ने और कैंसर में बदलने का खतरा रहता है।
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जब महिला सही उम्र (20 से 35 वर्ष) में गर्भधारण करती है, तो ये कोशिकाएं तेजी से परिपक्व (Mature) हो जाती हैं और अपने प्राकृतिक कार्य यानी दूध उत्पादन की ओर बढ़ जाती हैं, जिससे कैंसर बनने का रास्ता ब्लॉक हो जाता है।
रिसर्च रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े
'ब्रिटिश जर्नल ऑफ कैंसर' में प्रकाशित एक विस्तृत अध्ययन में कुछ बेहद हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं:
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60% तक बढ़ा खतरा: जिन महिलाओं का पहला बच्चा 30 वर्ष की उम्र के बाद होता है, उनमें मेनोपॉज (मासिक धर्म बंद होने) से पहले ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा उन महिलाओं की तुलना में 60% तक अधिक पाया गया है, जो 22 वर्ष की उम्र के आसपास मां बन चुकी थीं।
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हर प्रेग्नेंसी में सुरक्षा: रिपोर्ट के अनुसार, महिला जितनी बार सही उम्र में गर्भधारण करती है, हर प्रेग्नेंसी के साथ ब्रेस्ट कैंसर का खतरा लगभग 9% तक कम हो जाता है।
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स्तनपान (Breastfeeding) है सुरक्षा कवच: यदि कोई महिला बच्चे के जन्म के बाद 6 महीने या उससे अधिक समय तक स्तनपान कराती है, तो ब्रेस्ट कैंसर की संभावना बेहद कम हो जाती है। स्तनपान कराने से शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर नियंत्रित रहता है, जिससे कैंसर कोशिकाएं पनप नहीं पातीं।
कैंसर से बचाव के लिए अन्य जरूरी उपाय
कैंसर रिसर्च यूके की हेल्थ इंफॉर्मेशन हेड फियोना ऑसगन कहती हैं कि कैंसर एक बेहद जटिल बीमारी है। समय पर मां बनना इस खतरे को जरूर कम करता है, लेकिन बच्चे पैदा करना पूरी तरह से किसी भी महिला का व्यक्तिगत और सामाजिक परिस्थितियों पर निर्भर रहने वाला फैसला है। इसके अलावा भी महिलाएं अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करके इस खतरे को टाल सकती हैं:
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वजन को नियंत्रित रखें: मोटापा और शरीर में बढ़ती अतिरिक्त चर्बी कैंसर को दावत देती है, इसलिए नियमित व्यायाम करें।
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धूम्रपान और शराब से तौबा: स्मोकिंग और अल्कोहल का सेवन महिलाओं के हार्मोन्स को असंतुलित करता है, जिससे कैंसर का खतरा दोगुना हो जाता है। इनसे पूरी तरह दूरी बनाएं।
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सेल्फ एग्जामिनेशन: हर महिला को महीने में एक बार खुद से ब्रेस्ट सेल्फ-एग्जामिनेशन (स्तन की जांच) करनी चाहिए। यदि कोई भी छोटी गांठ या बदलाव महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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