फैक्ट्री के जहरीले धुएं से बामोर बेहाल, प्रदूषण नियंत्रण विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
बामोर। नेशनल हाईवे-44 के समीप संचालित एक औद्योगिक इकाई से उत्सर्जित हो रहे कथित रूप से हानिकारक धुएं के कारण स्थानीय नागरिकों में गहरा असंतोष व्याप्त है। क्षेत्रीय निवासियों का दावा है कि इस कारखाने की चिमनियों से चौबीसों घंटे निकलने वाले धुएं ने समूचे वातावरण को दूषित कर दिया है। इसके दुष्प्रभाव से स्थानीय लोगों को सांस लेने में कठिनाई, निरंतर खांसी, आंखों में तेज चुभन और सेहत से जुड़ी अन्य गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
शिकायतों के बाद भी जस की तस बनी है स्थिति
इलाके के लोगों का कहना है कि इस गंभीर पर्यावरणीय समस्या को लेकर वे कई बार आवाज उठा चुके हैं और लिखित शिकायतें भी दे चुके हैं, परंतु धरातल पर अब तक कोई बदलाव नहीं आया है। नागरिकों ने रोष जताते हुए कहा कि संबंधित उत्तरदायी विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी इस विषय पर मूकदर्शक बने हुए हैं और कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं, जिससे आम जनता का गुस्सा दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है।
उत्सर्जन की जांच और कार्रवाई की उठी मांग
बामोर क्षेत्र के ग्रामीणों और प्रभावित परिवारों ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि कारखाने से निकलने वाले धुएं और अन्य उत्सर्जनों की तुरंत तकनीकी जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि उद्योग द्वारा पर्यावरण सुरक्षा के निर्धारित नियमों और मानकों की अनदेखी पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कानून के दायरे में कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि आमजन को एक स्वच्छ और सुरक्षित परिवेश मिल सके।
प्रबंधन के रुख और आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार
इस पूरे विवाद को लेकर फिलहाल संबंधित फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या पक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया है। स्थानीय प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम द्वारा की जाने वाली निष्पक्ष जांच और उसकी रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक स्थिति साफ हो पाएगी कि प्रदूषण फैलाने के ये आरोप तकनीकी रूप से कितने सही हैं।

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