मोतिहारी। पूर्वी चम्पारण के भारत–नेपाल सीमा से जब्त किए गए हजारों कार्टून कच्चे केले की नीलामी में बड़ा खेल सामने आया है। मामला झरोखर थाना क्षेत्र का है, जहां एसएसबी द्वारा बरामद 1860 कार्टून केले की नीलामी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर थानाध्यक्ष और मजिस्ट्रेट ने मिलकर मनमानी की और खुली बोली की जगह अपने पसंदीदा व्यापारी को जिम्मेनामा पर केला दे दिया।

15 मार्च को जब्त किए गए थे केले

बताया जाता है कि 15 मार्च की रात करीब साढ़े 9 बजे एसएसबी ने पीठवा गांव के पास तस्करी के लिए रखे गए केले को जब्त किया था। प्रत्येक कार्टून का वजन करीब 13.5 किलो था और कुल कीमत लगभग 7.44 लाख रुपये आंकी गई थी। इसके बाद केला झरोखर थाना को सुपुर्द किया गया था।

नियमों की अनदेखी, बोली नहीं लगवाई गई?

नियम के अनुसार जब्त माल की नीलामी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में स्थानीय व्यापारियों के बीच खुली बोली से होनी चाहिए थी। लेकिन इस मामले में न तो बोली लगवाई गई और न ही पारदर्शिता बरती गई। सीधे एक व्यापारी को जिम्मेनामा पर केला सौंप दिया गया, जिससे पूरे मामले पर सवाल उठने लगे हैं।

12 दिन बाद भी पैसा जमा नहीं

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नीलामी के 12 दिन बाद भी इसकी राशि अंचल नजारत में जमा नहीं हो सकी है। इससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

क्या कहते हैं अधिकारी?

इस संबंध में झरोखर थानाध्यक्ष असलम अंसारी ने बताया कि जब्त केला खराब होने वाला था, इसलिए उसे एक व्यापारी को जिम्मेनामा बनाकर दे दिया गया। उस व्यापारी के यहां भी लगभग 500 से ज्यादा कार्टून सड़ गया। वह बेचारा भी क्या करे, अब तक बेच नहीं पाया है। जैसे ही बेच देगा, पैसा जमा हो जाएगा। हालांकि, व्यापारी का नाम बताने से वे परहेज करते रहे। वहीं मजिस्ट्रेट के रूप में गए घोड़ासहन बीडीओ चंदन जायसवाल से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि वह वहां गए तो थे, लेकिन पूरे मामले के बारे में थानाध्यक्ष ही बेहतर बता सकते हैं। पूरे मामले पर सीकरहना के एसडीएम विजय कुमार ने कहा कि नीलामी की प्रक्रिया पूरी की गई है या नहीं, और अब तक इसका पैसा अंचल नजारत में क्यों नहीं पहुंचा इसकी जांच कराई जाएगी।