बड़ा हादसा: डिप्टी सीएम की सुरक्षा में लगे एक जवान की मौत, दूसरा गंभीर रूप से घायल
राजस्थान के जयपुर में एक सड़क हादसे ने उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा की सिक्योरिटी में तैनात सिपाही की जिंदगी छीन ली. वहीं, दूसरा जवान गंभीर रूप से घायल हो गया. घायल जवान को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, जहां उसका इलाज जारी है. हादसा जयपुर के एमआई रोड पर मंगलवार की सुबह हुआ. इन जवानों की ड्यूटी डिप्टी सीएम के भरतपुर दौरे के लिए लगी थी. ये वहीं के लिए निकले थे.
हादसा सुबह करीब 8 बजे गवर्नमेंट हॉस्टल चौराहे के पास हुआ. हादसे से पहले दोनों जवान रामवतार और मनोज मीणा बाइक से ड्यूटी के लिए रवाना हुए थे. मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, सड़क पर एक तेज रफ्तार गाड़ी की टक्कर ने दोनों को हवा में उछाल दिया. इस दौरान मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने लोगों की मदद से दोनों को तुरंत जयपुर के एसएमएस ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया.
हादसे में एक जवान शहीद
ट्रॉमा सेंटर इंचार्ज और वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग धाकड़ के मुताबिक, रामवतार को जब लाया गया तब उसकी हालत बेहद नाजुक थी. जांच में सामने आया कि टक्कर के कारण उसके हार्ट की मेन आर्टरी डेमेज हो चुकी थी, जिससे शरीर में रक्त संचार रुक गया. तमाम प्रयासों के बावजूद डॉक्टर जवान रामवतार को नहीं बचा सके. वहीं दूसरे जवान मनोज मीणा की हालत अभी स्थिर है और उसका इलाज जारी है.
उपमुख्यमंत्री पहुंचे ट्रॉमा सेंटर
घटना की खबर मिलते ही उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा तय कार्यक्रम को स्थगित कर तुरंत एसएमएस हॉस्पिटल पहुंचे. उन्होंने घायल जवानों की स्थिति की जानकारी ली और डॉक्टरों को निर्देश दिया कि किसी भी तरह की कोताही न बरती जाए.
ड्यूटी पर जा रहे थे जवान
डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा का मंगलवार को भरतपुर में महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होने का कार्यक्रम था. दोनों जवान उसी ड्यूटी को निभाने के लिए सुबह बाइक से रवाना हुए थे. लेकिन इस हादसे ने ड्यूटी पर जा रहे जाबांज सिपाही की जिंदगी छीन ली.
राजनीतिक हलकों में शोक की लहर
इस हादसे के बाद राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई. कई मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने जवान की शहादत पर दुख जताया है. सोशल मीडिया पर भी रामवतार को श्रद्धांजलि देने का सिलसिला शुरू हो गया है.
प्रशासन पर उठ रहे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर सिस्टम की अनदेखी को सामने ला दिया है. क्या वीआईपी ड्यूटी पर तैनात जवानों के लिए कोई विशेष सुरक्षा या ट्रैवल सुविधा नहीं होनी चाहिए? जब राज्य के सबसे बड़े अधिकारियों की सुरक्षा में लगे जवान भी असुरक्षित हैं, तो आम लोगों की सुरक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

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