मैसूर कैंपस से निकाले गए कर्मचारियों का कहना बाहर किया गया
देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इन्फोसिस ने अपने मैसूरु कैंपस से 300 से ज्यादा ट्रेनी कर्मचारियों को निकाल दिया है। ये कर्मचारी कंपनी के अंदरूनी आकलन में बार-बार फेल हो गए थे। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के मुताबिक निकाले गए इन ट्रेनी कर्मचारियों को उसी दिन कैंपस छोड़ने को कह दिया गया। यहां तक कि रात को रुकने की उनकी गुहार को भी कंपनी ने ठुकरा दिया। कंपनी से निकाले गए एक ट्रेनी ने बताया कि उनकी एक महिला सहकर्मी ने रात को कैंपस में रुकने की गुहार लगाई थी लेकिन कंपनी ने उसके अनुरोध को नहीं माना।
रिपोर्ट के मुताबिक निकाली गई महिला ट्रेन ने कंपनी मैनेजमेंट से रात को रुकने का अनुरोध किया था। 7 फरवरी को उसने कहा, 'कृपया मुझे रात में रुकने दें। मैं कल चली जाऊंगी। अभी मैं कहां जाऊंगी?' लेकिन इन्फोसिस के अधिकारियों ने कथित तौर पर जवाब दिया, 'हमें नहीं पता। अब आप कंपनी का हिस्सा नहीं हैं। शाम 6 बजे तक परिसर खाली कर दें।' PTI के मुताबिक निकाले गए ट्रेनी कर्मचारियों ने मैसूरु कैंपस में शुरुआती प्रशिक्षण लिया था, लेकिन तीन प्रयासों के बाद भी वे आंतरिक मूल्यांकन पास नहीं कर पाए। इन्फोसिस ने कहा कि सभी नए लोगों को कंपनी में बने रहने के लिए ये आकलन पास करने जरूरी हैं।
कंपनी ने क्या कहा
कंपनी ने कहा, 'इन्फोसिस में हमारी भर्ती प्रक्रिया बहुत कड़ी है। हमारे मैसूरु कैंपस में व्यापक बुनियादी प्रशिक्षण के बाद सभी नए लोगों से आंतरिक मूल्यांकन पास करने की उम्मीद की जाती है। सभी नए लोगों को मूल्यांकन पास करने के लिए तीन मौके मिलते हैं, अगर वो इसमें असफल रहते हैं तो वे कंपनी के साथ नहीं रह पाएंगे। यह शर्त उनके अनुबंध में भी लिखी है।' निकाले गए कई ट्रेनी कर्मचारियों को इन्फोसिस जॉइन करने के लिए ऑफर लेटर मिलने के बाद दो साल से ज्यादा इंतजार करना पड़ा था। लेकिन नौकरी शुरू करने के कुछ महीनों के अंदर ही उन्हें निकाल दिया गया।
आईटी कर्मचारी संघ NITES ने दावा किया है कि इन्फोसिस से निकाले गएनए कर्मचारियों की संख्या बताई गई संख्या से कहीं ज्यादा है। संघ ने श्रम और रोजगार मंत्रालय में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराने की धमकी दी है। NITES ने सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप और कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ET.com ने इस बारे में इन्फोसिस से जवाब मांगा है।

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