गंगा ब्रिज प्रोजेक्ट लगभग पूरा, अब जल्द दौड़ेंगी गाड़ियां
पटना: बिहार की राजधानी पटना और वैशाली के बीच गंगा नदी पर निर्माणाधीन कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्स लेन ब्रिज अब पूरी तरह तैयार है। उत्तर और दक्षिण बिहार की दूरी कम करने वाला यह महासेतु न केवल राज्य की यातायात व्यवस्था को नई मजबूती देगा, बल्कि आर्थिक प्रगति के द्वार भी खोलेगा। अधिकारियों के अनुसार, पुल और एप्रोच रोड का निर्माण कार्य अंतिम चरण को पार कर चुका है और जल्द ही इसे आम जनता के आवागमन के लिए समर्पित कर दिया जाएगा। यह ब्रिज पटना रिंग रोड का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग 31 और हाजीपुर-समस्तीपुर मार्ग के बीच सीधा संपर्क स्थापित हो जाएगा।
इंजीनियरिंग का बेमिसाल नमूना और 'स्टेट ऑफ आर्ट' डिजाइन
9.76 किलोमीटर लंबा यह छह लेन पुल अपनी अनूठी बनावट के कारण 'स्टेट ऑफ आर्ट' ब्रिज की श्रेणी में शामिल किया गया है। तकनीकी रूप से इसे 'एक्स्ट्रा डोज्ड केबल स्टेड ब्रिज' कहा जाता है, जो इंजीनियरिंग की दुनिया में एक मिसाल है। विभागीय जानकारों का दावा है कि छह लेन के रूप में यह देश के सबसे बड़े केबल स्टेड पुलों में से एक है। पूरी परियोजना के दौरान कुल 2,968 सेगमेंट का निर्माण किया गया, जिनका सफल स्थापन (इरेक्शन) साइट पर हो चुका है। पुल की चौड़ाई 32 मीटर रखी गई है, जिससे वाहनों को पर्याप्त जगह मिलेगी और यातायात सुगम बना रहेगा।
रफ्तार और निवेश का संगम
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा करने में राज्य सरकार और एशियाई विकास बैंक (ADB) का महत्वपूर्ण सहयोग रहा है। पुल के निर्माण के लिए जहां ADB से 3,000 करोड़ रुपये का ऋण लिया गया, वहीं बिहार सरकार ने अपने संसाधनों से लगभग 2,000 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस ब्रिज की सबसे खास बात इसकी गति सीमा है; इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि इस पर वाहन 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगे। राघोपुर दियारा जैसे दुर्गम क्षेत्रों की पटना से कनेक्टिविटी पहले ही सुनिश्चित की जा चुकी है, जिससे स्थानीय आबादी को बड़ा लाभ मिलेगा।
बिहार की कनेक्टिविटी में नया अध्याय
बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक शीर्षत कपिल अशोक ने इस सफलता के लिए इंजीनियरों और निर्माण कंपनी 'देवू लार्सन टुब्रो' के अधिकारियों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह ब्रिज बिहार के रोड नेटवर्क में एक नया अध्याय लिखेगा। पुल के चालू होने से पटना के शहरी इलाकों में ट्रैफिक का दबाव कम होगा और उत्तर बिहार से आने-जाने वाले मालवाहक ट्रकों को शहर के बाहर-बाहर ही रास्ता मिल जाएगा। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि ईंधन की खपत में भी कमी आएगी, जो राज्य के समग्र विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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