ऐतिहासिक जैन उपासरा जमींदोज, अवैध खुदाई के बीच बड़ा हादसा टला
जैसलमेर। स्वर्णनगरी के ऐतिहासिक राखेचा पाड़ा इलाके में गुरुवार को एक बेहद दुखद वाकया सामने आया, जब जैन समुदाय की करीब ढाई सौ साल पुरानी ऐतिहासिक उपासरा इमारत अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई। शुरुआती तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि इस प्राचीन भवन के पास कथित तौर पर बिना प्रशासनिक मंजूरी के की जा रही गहरी खुदाई की वजह से इसकी बुनियाद कमजोर पड़ गई थी। इसी लापरवाही के कारण सदियों पुरानी यह अनमोल धरोहर देखते ही देखते मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। घटना के वक्त हुए जोरदार धमाके को सुनकर आस-पास के लोग बदहवास होकर मौके पर पहुंचे। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, नगर परिषद और प्रशासनिक अमला तुरंत घटना स्थल पर पहुंचा और राहत कार्य शुरू कराए।
सांस्कृतिक धरोहर का अंत और हादसे की मुख्य वजह
यह प्राचीन उपासरा भवन महज ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं था, बल्कि जैन समाज की गहरी आस्था, धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का एक बड़ा केंद्र था। लंबे समय तक यहां जैन मुनियों और साध्वियों के चातुर्मास प्रवास तथा धार्मिक सभाओं का आयोजन होता रहा था। चूना-पत्थर से निर्मित यह इमारत जैसलमेर की पारंपरिक नक्काशी और स्थापत्य कला का एक बेहतरीन नमूना थी, हालांकि पिछले कुछ समय से इसका इस्तेमाल एक गोदाम के तौर पर हो रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस इमारत से बिल्कुल सटकर एक अन्य निर्माण कार्य के लिए करीब 15 फीट गहरा बेसमेंट खोदा जा रहा था। इस अंधाधुंध खुदाई के दौरान सुरक्षा मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया, जिससे पुरानी इमारत के नीचे की मिट्टी खिसक गई और उसकी नींव कमजोर होने से यह पूरी संरचना जमींदोज हो गई।
श्रमिकों की सूझबूझ से बची जान और प्रशासनिक सुरक्षा उपाय
एक सुखद पहलू यह रहा कि इस हादसे के दौरान किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। बताया जा रहा है कि खुदाई के काम में लगे करीब 10 से 12 मजदूरों को दीवार से पत्थर गिरने और मिट्टी दरकने के कारण खतरे का आभास पहले ही हो गया था। अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए सभी श्रमिक समय रहते वहां से सुरक्षित बाहर निकल आए, जिसके कुछ ही पलों बाद यह विशालकाय भवन भरभराकर गिर पड़ा। हादसे के बाद सुरक्षा के लिहाज से शहर कोतवाली थानाधिकारी सुरजाराम जाखड़ ने एहतियाती कदम उठाते हुए आस-पास बने मकानों में रह रहे दो परिवारों को तुरंत दूसरी जगह शिफ्ट होने की हिदायत दी है। इसके साथ ही संभावित खतरों को टालने के लिए उस पूरी गली को बैरिकेड्स लगाकर आमजन के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
अवैध निर्माण पर शिकंजा और संरक्षण व्यवस्था पर खड़े हुए सवाल
प्रशासनिक जांच में यह साफ हुआ है कि जिस बेसमेंट के लिए वहां इतनी गहरी खुदाई की जा रही थी, उसके लिए नगर परिषद से कोई वैध स्वीकृति नहीं ली गई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने इसकी विस्तृत रिपोर्ट पुरातत्व विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को भेज दी है। अधिकारियों का कहना है कि नियमों को ताक पर रखकर ऐतिहासिक महत्व वाले क्षेत्रों के पास अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। बहरहाल, इस घटना ने जैसलमेर जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन और ऐतिहासिक शहर में प्राचीन हवेलियों व ऐतिहासिक विरासतों के संरक्षण को लेकर चल रहे दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।

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