एसडीएम पर भी भड़की सांसद जसकौर मीणा
जयपुर । शक्ति वंदन कार्यक्रम में भाजपा सांसद जसकौर मीणा एसडीम पर भड़क गयीं। उन्होंने फोन कर उन्हें जमकर फटकरा भी। इस पर एसडीएम ने कहा कि उन्हें कार्यक्रम के बारे में जानकारी नहीं थी। इसके बाद सांसद का पारा और चढ़ गया। हालाकि राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता है अक्सर यह कहावत लोगों के बीच सुनने को मिली है। लेकिन भाजपा की सांसद ने इसे सही साबित करके दिखा दिया है।
ऐसा करने वाली भाजपा सांसद हैं जसकौर मीणा जो पोस्टर पर अपनी ही पार्टी के विधायक किरोड़ीलाल मीणा की तस्वीर देखकर भड़क गई थीं। दरअसल भाजपा सांसद जसकौर मीणा के संसदीय क्षेत्र में शक्ति वंदन स्वंय सहायता समूह सखी सम्मान समारोह आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम के पोस्टर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्री भजनलाल और विधायक किरोड़ीलाल मीणा की तस्वीर लगी हुई थी। मीणा की तस्वीर देखकर सांसद जसकौर भड़क उठीं। उन्होंने मंच से ही राजीविका मिशन अधिकारी बलदेव गुर्जर को फोन घुमाया और फिर जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के पोस्टर में न तो स्थानीय विधायक रामबिलास का फोटो है और न मेरा है। इसमें किरोड़ी का फोटो लगा रखा है उसका यहां क्या लेना-देना है। सांसद बोलीं पीएम मोदी द्वारा ग्रामीण महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए ये कार्यक्रम किए जा रहे हैं लेकिन जमीन स्तर खानापूर्ति की जा रही है। अगर मैं यहां नहीं आती तो आप लोगों की पोल नहीं खुलती।

एमपी विधानसभा के बजट सत्र में हाई अलर्ट,परिसर में अंगरक्षकों की एंट्री पर रोक
असम में ‘मिया’ मुसलमानों को लेकर क्यों तेज हुई सियासी मुहिम? विवादित वीडियो से बढ़ा राजनीतिक टकराव
जनसंपर्क अधिकारी पर दबाव का आरोप, रॉयल प्रेस क्लब पहुंचा थाने
वाराणसी कचहरी में बम धमकी से हड़कंप, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर
कुक स्ट्रेट फतह करने वाले पहले एशियन पैरास्विमर बने सतेंद्र, 9 घंटे 22 मिनट में रचा इतिहास
राज्यसभा में कांग्रेस के भीतर तकरार, खरगे और जयराम रमेश के बीच तीखी बहस
जयपुर में दिल दहला देने वाली वारदात, पिता ने 8 महीने की मासूम की हत्या की
धीरेन्द्र शास्त्री की ‘माला-भाला’ नसीहत पर सियासी बवाल, कांग्रेस ने FIR की मांग उठाई
मनसे नेता देशपांडे ने उद्धव गुट के पार्षदों पर लगाए गंभीर आरोप… बोले- एक-एक करोड़ में बिके
कचरा प्रबंधन नियमों में बार-बार बदलाव से जमीनी हकीकत में सुधार नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट