तकनीक के दौर में हावी रहे पुराने प्रचार के तरीके
नई दिल्ली । वर्तमान में जब पार्षद से लेकर लोकसभा के चुनाव में युवाओं का समर्थन हासिल करने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल आम है। उस दौर में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) चुनाव में प्रचार का पुराने तरीके पर छात्र संगठनों ने भरोसा जताया है। बाहरी लोगों तक जानकारी पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा छात्र संगठनों ने जरूर लिया है, लेकिन परिसर के अंदर छात्रों से संवाद के पुराने तरीके पर ही भरोसा जताया है। बुधवार को प्रचार का आखिरी दिन था और प्रत्याशी दिनभर छात्रावास और मैस में चक्कर लगाते रहे। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में चार वर्ष बाद छात्र संघ चुनाव हो रहे हैं। 22 मार्च को मतदान किया जाना है। जेएनयूएसयू चुनाव में मुख्य तौर पर मुकाबला अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (डीएसएफ), स्टूडेंट्स फेडरेशन आफ इंडिया (एसएफआइ) और आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआइएसएफ) के यूनाइटेड लेफ्ट गठबंधन में है। एबीवीपी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य उन्नति पंजीकर ने कहा, एबीवीपी की इंटरनेट मीडिया टीम सक्रिय है। मंगलवार रात मशाल जुलूस निकाला गया था। उसे अलग-अलग एक्स हैंडल से शेयर किया गया। सोशल मीडिया प्लेटफार्म का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन जेएनयू में प्रचार के लिए पर्चे बांटना और संपर्क करना सबसे मजबूत प्रचार का तरीका है। हमनें इस वर्ष पर्चों का आकार छोटा किया है और प्वाइंटर में एजेंडे दिए हैं। ताकि छात्रों को वह पसंद आ सकें। विपक्षी पेराग्राफ में बड़े-बड़े पर्चे बांट रहे हैं, उससे कुछ अलग करने की हमने कोशिश की है। सभी प्रत्याशी एबीवीपी के पिछले पांच वर्षों में परिसर, प्रवेश, परीक्षा, परिणाम, छात्रावास व फेलोशिप के विषयों में किए गए सकारात्मक कार्यों के बारे में अवगत करा रहे हैं। चूंकि चुनाव चार साल बाद हो रहे हैं और ऐसे छात्रों की संख्या बहुत अधिक है, जो पहली बार वोट कर रहे हैं। हम उनको जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन, जेएनयू में छात्रावास, मैस, कक्षाओं में ही छात्रों से संपर्क किया गया है। कई छात्रों की टोलियां हैं, उनसे भी समर्थन हासिल किया जा रहा है।

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