रात 1:34 बजे तक ऑनलाइन एक्टिविटी ने बढ़ाए सवाल
लखनऊ। के आशियाना के सेक्टर एल में रहने वाले पैथोलॉजी संचालक एवं शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह (49) की हत्या के बाद आरोपी बेटे ने शव के चार टुकड़े किए थे। अक्षत ने पेट और पीठ भी काटकर अलग करने का प्रयास किया था, लेकिन रीढ़ की हड्डी नहीं काट सका। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पेट और पीठ पर आठ-आठ इंच गहरे कट के निशान मिले हैं। पुलिस ने मंगलवार को घटनास्थल पर क्राइम सीन का रीक्रिएट किया। इस दौरान अक्षत प्रताप सिंह (21) भी मौजूद रहा। पुलिस ने उसके बयान के आधार पर फोरेंसिक टीम की मौजूदगी में घटना को दोहराया। आरोपी ने बयान दिया था कि तीसरे तल पर उसने पिता की गोली मारकर हत्या कर दी थी। फिर शव को भूतल पर लाकर बाथरूम में 20 फरवरी की शाम को टुकड़े कर दिए थे। दुर्गंध छिपाने के लिए रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल कर रहा था। उधर, पुलिस सोमवार देर रात अक्षत को लेकर उसके घर पहुंची। आरोपी ने पिता की लाइसेंसी राइफल से गोली मारकर हत्या के बाद असलहे को बेड के नीचे छिपा दिया था। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने उसे बरामद कर लिया।
मुनीम के आने से धड़ को नहीं लगा पाया था ठिकाने
पकड़े जाने के डर से अक्षत सोमवार को ड्रम में भरे पिता के धड़ को कार से ठिकाने लगाने ले जा रहा था। इसी बीच शराब ठेके के मुनीम घर पर पहुंच गए। इससे अक्षत धड़ को ठिकाने नहीं लगा सका था। इस मामले में आशियाना थाने के दरोगा अग्रचारी यादव की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई है। एसीपी कैंट के मुताबिक, छानबीन में मानवेंद्र के घर से किसी प्रकार का ज्वलनशील पदार्थ नहीं मिला है। घर के भीतर पैथोलॉजी से संबंधित कुछ केमिकल रखे थे। पूछताछ में अक्षत ने धड़ को घर में जलाने की बात से इन्कार किया है। अक्षत ने आरी के अलावा दो चाकू भी खरीदे थे, जिन्हें बरामद कर लिया गया है।
दीवार को पेंट कर साफ की खून की छींटे
मानवेंद्र के सिर में गोली लगने से चारों तरफ खून बिखर गया था। खून के छींटे दीवारों पर लग गए थे, जिन्हें साफ करने के लिए अक्षत पेंट खरीद कर लाया। इसके बाद दीवार को पेंट किया। इस मामले में मानवेंद्र के पिता से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया। शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल से किया गया। वीडियोग्राफी भी कराई गई। बुधवार को शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
अक्षत ने बनाया था वाट्सएप ग्रुप, पापा लौट आओ
परिजनों और मानवेंद्र के दोस्तों को गुमराह करने के लिए अक्षत ने पिता के लापता होने की अफवाह उड़ाई। इसके बाद वाट्स एप ग्रुप बनाया। इसमें मानवेंद्र के दोस्तों को जोड़ा। ग्रुप में वह लिखता रहा कि पापा, आप कहां हो। आप प्लीज वापस आ जाओ... कृति और मैं आपको मिस कर रहे हैं। आपके दोस्त भी आपकी तलाश कर रहे हैं। किसी को शक ने हो इसके लिए अक्षत मानवेंद्र के दोस्तों के साथ पिता की तलाश का नाटक करता रहा। सूत्रों का कहना है कि अक्षत ने ग्रुप इसलिए बनाया था कि उसे सारी गतिविधियों की जानकारी हो सके।
पिता बेटे को देते थे 27 हजार रुपये वेतन
मानवेंद्र बेटे से सभी पैथोलॉजी सेंटर का संचालन करवाना चाहते थे। उन्होंने पारा स्थित वर्धमान पैथोलॉजी के संचालन का जिम्मा भी दे दिया था। इसके लिए वह बेटे को 27 हजार रुपये वेतन भी देते थे। अक्षत कॉलेज से आने के बाद पैथोलॉजी में जाकर बैठता था। अक्षत के दोस्तों का कहना है कि हत्या के पीछे नीट निकालने का दबाव नहीं है। किसी और वजह से उसने पिता की हत्या की है। डीसीपी मध्य विक्रांत वीर के मुताबिक, कई पहलुओं पर मामले की छानबीन की जा रही है। साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
यह था मामला
लखनऊ के आशियाना के सेक्टर एल में रहने वाले शराब कारोबारी व पैथोलॉजी संचालक मानवेंद्र सिंह (49) की उन्हीं के बेटे अक्षत प्रताप सिंह (21) ने गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद शव के टुकड़े कर दोनों हाथ व पैर पारा के सदरौना इलाके में
डीसीपी मध्य विक्रांत वीर के मुताबिक, 21 फरवरी को आशियाना थाने पर मानवेंद्र सिंह की गुमशुदगी की शिकायत मिली थी। पुलिस ने सचिवालय सुरक्षा में तैनात मानवेंद्र के भाई अरविंद कुमार से मामले की जानकारी ली। इसके बाद अक्षत से पूछताछ की तो पता चला कि मानवेंद्र बेटे पर नीट परीक्षा की तैयारी का दबाव बना रहे थे। 20 फरवरी को सुबह 4:30 बजे इसी बात को लेकर पिता-पुत्र में विवाद हो गया। गुस्से में आकर अक्षत ने पिता को लाइसेंसी राइफल से गोली मार दी। मानवेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के वक्त अक्षत की छोटी बहन कृति अपने कमरे में सो रही थी। आवाज सुनकर वह कमरे में पहुंची तो पिता का शव कमरे में पड़ा था। मानवेंद्र के पिता सुरेंद्र पाल सिंह सेवानिवृत्त दरोगा हैं। वह जालौन में रहते हैं। घटना की सूचना पर आशियाना पहुंच गए हैं। पुलिस ने शव के टुकड़ों को पोस्टमार्टम हाउस में रखवाया है। हाथ और पैर बरामद कर लिए गए हैं।
हाथ-पैर फेंके, सिर सहित धड़ घर में ड्रम में मिला
वारदात मकान के तीसरे तल पर हुई। पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि हत्या के बाद वह शव को घसीटते हुए भूतल पर लाया। यहां खाली कमरे में शव रख दिया। इसके बाद शव को ठिकाने लगाने का प्लान बनाया।पहले कार में लादकर गोमती नदी में फेंकने की साजिश रची, लेकिन शव का वजन ज्यादा था। इससे वह अकेले ऐसा नहीं कर पाया। इसके बाद आरी खरीदकर लाया और पिता के शव के टुकड़े कर दिए। धड़ ठिकाने नहीं लगा सकने पर नीला ड्रम खरीदकर लाया और उसमें डाल दिया। इससे पहले कि अक्षत धड़ को ठिकाने लगाता उसकी करतूत उजागर हो गई।

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