सोयाबीन का इस्तेमाल बायोफ्यूल में बढ़ा, वैश्विक आपूर्ति पर असर
नई दिल्ली: घरेलू बाजार में पिछले एक महीने के दौरान सोयाबीन और सोयामील की कीमतों में आई भारी तेजी ने पूरे बाजार का गणित बदल कर रख दिया है। साल 2021 के बाद यह पहला मौका है जब भारतीय निर्यातकों को भारी नुकसान और बढ़ती कीमतों के चलते 25,000 टन सोयामील के निर्यात सौदे रद्द करने पड़े हैं। स्थानीय बाजार में बढ़ती मांग की पूर्ति के लिए अफ्रीकी देशों से लगभग 80,000 टन सोयाबीन आयात करने का फैसला किया गया है। बाजार जानकारों का मानना है कि नई फसल के बाजार में आने तक आपूर्ति बेहद सीमित रहेगी, जिसके कारण इस साल कुल सोयाबीन आयात 8 लाख टन के ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी आंकड़ों और व्यापारियों के अनुमानों में बड़ा अंतर होने के कारण भी असमंजस की स्थिति है। कृषि मंत्रालय के तीसरे अग्रिम अनुमान में फसल वर्ष 2025-26 के लिए सोयाबीन उत्पादन 125.96 लाख टन रहने की बात कही गई है। इसके अलावा अल नीनो के खतरे और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के महंगे होने से खाद्य तेल उत्पादक देशों ने सोयाबीन का इस्तेमाल जैव ईंधन (बायोफ्यूल) बनाने में बढ़ा दिया है, जिससे खाने वाले तेल और सोयाबीन की किल्लत और गहरा गई है।
1. निर्यात सौदे रद्द होने की बड़ी वजह
सोयाबीन से तेल निकालने के बाद बचने वाली खली को सोयामील कहा जाता है, जिसका मुख्य उपयोग पशु आहार में होता है। घरेलू बाजार में सोयाबीन के दाम आसमान छूने से सोयामील की कीमत 66,000 रुपये प्रति टन के पार चली गई। कीमतों में प्रति टन लगभग 200 डॉलर का उछाल आने की वजह से निर्यातकों के लिए पुराने सौदों को पूरा करना घाटे का सौदा बन गया। इसके चलते मई और जून में भेजी जाने वाली शिपमेंट के सौदे आपसी सहमति से निरस्त कर दिए गए।
2. देश में अनाज उत्पादन का नया कीर्तिमान
एक तरफ जहां सोयाबीन को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं, वहीं दूसरी तरफ देश के कुल अनाज उत्पादन के मोर्चे पर बेहद राहत भरी खबर है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025-26 में देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 3765.63 लाख टन तक पहुंचने की उम्मीद है। यह पिछले साल के 3577.32 लाख टन के मुकाबले 5.3 फीसदी की शानदार बढ़ोतरी को दर्शाता है।
3. रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा धान और गेहूं का उत्पादन
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि इस बार चावल का उत्पादन रिकॉर्ड 1540.24 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले आंकड़ों से लगभग 38.40 लाख टन ज्यादा है। वहीं, देश के प्रमुख खाद्य अनाज गेहूं का उत्पादन भी 1206.57 लाख टन होने की उम्मीद जताई गई है, जो पिछले साल के 1179.45 लाख टन के मुकाबले 27.12 लाख टन अधिक है।
4. मक्का और दलहन-तिलहन के बदलते आंकड़े
इस साल सबसे बड़ी छलांग मक्के की पैदावार में देखी गई है। मक्के का उत्पादन 550.93 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा महज 434.09 लाख टन था। इसके अलावा, मोटे अनाजों का उत्पादन 744.72 लाख टन और तिलहन की कुल पैदावार 430.59 लाख टन रहने की संभावना है। वहीं दलहन फसलों की बात करें तो अरहर (तुअर) का उत्पादन 35.92 लाख टन रहने की उम्मीद है, जो लगभग पिछले वर्ष के स्तर के बराबर ही है।

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