भ्रष्टाचार और हिस्सेदारी के आरोपों में घिरे तबादले
सरकारी विभागा में हुए तबादले भ्रष्टाचार, हिस्सेदारी से लेकर मनमानी तक के आरोपों में घिर गए हैं। गुरुवार को तो निबंधन विभाग में मामला सामने आया ही, इससे पहले होम्योपैथी विभाग में स्थानांतरण आदेश निरस्त किए जा चुके हैं।
वहीं, बेसिक शिक्षा, स्वास्थ्य, आयुष आदि विभागों में आरोपों के चलते तबादला आदेश जारी ही नहीं हो सके और सत्र शून्य हो चुका है। वहीं सपा मुखिया अखिलेश यादव ने निबंधन विभाग के मामले को लेकर सरकार पर हमला बोला है।
स्थानांतरण नीति के तहत 15 मई से 15 जून तक तबादले किए जाने थे। परंतु ज्यादातर विभागों ने 14 व 15 जून को स्थानांतरणों को अंतिम रूप दिया गया। आरोप लग रहे हैं कि मनचाही तैनाती को सौदेबाजी के चलते ऐसी स्थिति बनी।
इसके बाद अधिकारियों और मंत्रियों के बीच समन्वय की कमी ने भी रोड़ा अटकाया। बेसिक शिक्षा विभाग में तबादला सूची तैयार कर ली गई, परंतु उसे ऊपर से अनुमोदन नहीं मिला। ऐसे में स्थानांतरण हो ही नहीं पाए।
स्वास्थ्य और आयुष विभाग में भी यही स्थिति बनी। यहां भी सत्र शून्य हो गया। वहीं होम्योपैथी में तबादला आदेशों को शिकायतों के चलते निरस्त कर दिया गया। आबकारी विभाग में भी तबादलों को लेकर मनमानी की चर्चाएं हो रही हैं।
गौर करने की बात यह है कि स्थानांतरण न होने से वर्षों से एक ही कुर्सी पर जमे अफसरों को फायदा मिल गया है। प्राविधिक शिक्षा सहित कई ऐसे विभाग भी हैं, जहां वर्षों से तबादले किए ही नहीं गए।
इन स्थितियों में प्रश्न तो पहले से ही उठ रहे थे, परंतु निबंधन विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवीन्द्र जायसवाल द्वारा खुलकर मोर्चा खोलने से अब विरोधियों को निशाना साधने का अवसर मिल गया है।
गुरुवार को इसे लेकर अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा कि सच तो ये है कि कई मंत्रियों ने ट्रांसफर की फीस नहीं मिलने पर फाइल लौटा दी हैं। उन्होंने कहा कि जिसको हिस्सा न मिल रहा, वो ही राज खोल रहा है।
दूसरी तरफ नीति के तहत 15 जून तक तबादले न हो पाने पर अब सभी संबंधित विभागों के तबादले संबंधी मामलों में अब अंतिम फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्तर से ही किया जाएगा।

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